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रुद्राक्ष करुंगली माला [Rudraksh - Karungali Mala] (मेटल कैप सहित) – 54 दाने

रुद्राक्ष करुंगली माला [Rudraksh - Karungali Mala] (मेटल कैप सहित) – 54 दाने

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🔱 रुद्राक्ष–करुंगली माला (54 दाने) – दिव्य शक्ति और सुरक्षा का अद्वितीय संगम 🔱

प्राकृतिक रुद्राक्ष और पवित्र करुंगली लकड़ी से बनी यह विशेष 54 दानों की माला आध्यात्मिक ऊर्जा, सुरक्षा और आत्मबल को एक साथ प्रदान करने वाली प्रभावशाली साधना माला है। रुद्राक्ष की दिव्यता और करुंगली की सुरक्षात्मक शक्ति मिलकर एक शक्तिशाली सकारात्मक आभामंडल तैयार करती है।

यह माला जप, ध्यान और दैनिक धारण – तीनों के लिए उपयुक्त है। आकर्षक फिनिश और मजबूत धागे के साथ तैयार की गई यह माला साधना के साथ-साथ स्टाइलिश लुक भी देती है।

✨ आध्यात्मिक लाभ:

  • 🕉️ भगवान शिव की कृपा प्राप्ति में सहायक
  • 🛡️ नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष से सुरक्षा
  • 💪 आत्मविश्वास और मानसिक शक्ति में वृद्धि
  • 🧘 ध्यान और एकाग्रता को मजबूत करता है
  • 🌟 आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक कंपन

🔹 उत्पाद विवरण:

  1. 📿 दाने: 54 (रुद्राक्ष एवं करुंगली संयोजन)
  2. 🌿 मटेरियल: प्राकृतिक रुद्राक्ष + करुंगली लकड़ी
  3. 🧵 मजबूत धागा / प्रीमियम फिनिश
  4. 🙏 उपयोग: जप, ध्यान, पूजा या दैनिक धारण

🔹 धारण विधि :

करुंगली और रुद्राक्ष की संयुक्त माला (Karungali Rudraksha Mala) पहनने के लिए सबसे शुभ समय सोमवार या शनिवार की सुबह स्नान के बाद है। माला को शुद्ध करने के लिए इसे पानी में, फिर कच्चे दूध से शुद्ध करें, फिर सुखाएं और पूजा स्थल पर रखकर 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का 108 बार जाप कर धारण करें।

करुंगली रुद्राक्ष माला धारण करने की चरण-दर-चरण विधि

  1. शुद्धिकरण (Cleansing): माला को धारण करने से पहले इसे पवित्र करना आवश्यक है। इसे साफ पानी में भिगोकर शुद्ध करें।
  2. ऊर्जावान करना (Energizing): इसके बाद माला को कच्चे दूध से शुद्ध करें। इससे माला की ऊर्जा जागृत होती है।
  3. धोना और सुखाना: शुद्ध करने के बाद माला को किसी साफ कपड़े से पोंछकर सूखने दें।
  4. पूजा-अर्चना: माला को पूजा स्थान पर भगवान शिव या भगवान मुरुगन की तस्वीर/मूर्ति के सामने रखें। धूप, दीपक और अगरबत्ती जलाएं।
  5. मंत्र जाप: माला को हाथ में लेकर 'ॐ नमः शिवाय' (Om Namah Shivaya) या 'ॐ सरवाना भव' (Om Saravana Bhava) मंत्र का 108 बार जाप करें।
  6. धारण करना: जाप पूर्ण होने के बाद, श्रद्धापूर्वक भगवान से अपनी मनोकामना कहें और माला को गले में धारण करें।

करुंगली माला धारण करने के नियम और सावधानियां

  • सर्वोत्तम दिन: इस माला को शनिवार (शनि देव का दिन) या सोमवार (शिव जी का दिन) को पहनना सबसे शुभ माना जाता है।
  • समय: इसे सुबह ब्रह्म मुहूर्त (4:00 - 6:00 बजे) या 9:00 बजे से पहले पहनना सबसे अच्छा है।
  • सात्विकता: माला धारण करने के बाद सात्विक जीवन जिएं। मांस-मदिरा का सेवन न करें।
  • सावधानी: स्नान करते समय, सोते समय, या किसी भी अपवित्र स्थान पर जाते समय माला उतार देनी चाहिए। इसे रात में न पहनें, सुबह स्नान के बाद दोबारा पहनें।
  • रखरखाव: माला को पानी से बचाएं, क्योंकि यह लकड़ी की बनी होती है।

करुंगली माला शनि दोष को कम करती है, जबकि रुद्राक्ष शिव की कृपा और मानसिक शांति प्रदान करते हैं।

यह रुद्राक्ष–करुंगली माला उन साधकों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से लाभकारी है जो जीवन में शक्ति, शांति और आध्यात्मिक संरक्षण चाहते हैं।

अपने जीवन में दिव्य ऊर्जा और सुरक्षा का संचार करने के लिए इस पवित्र माला को आज ही धारण करें। 🔱✨

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